बॉलीवुड के हीरो नंबर अभी अपने पर्सनल लाइफ में संघर्षरत हैं, गोविंदा उबर भी जाएंगे तो सबकुछ पहले जैसा नहीं रहने वाला है. प्रोफेशनल लाइफ भी गोविंदा का पिछले दो दशकों से संघर्षरत ही बीता है. कई बार लोग कहते हैं कि उम्र हो गई, अब गोविंदा में वो बात नहीं है? भई उम्र तो अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, रजनीकांत और मोहन लाल की भी हो चुकी है, लेकिन उनको न केवल सोलो फिल्में मिली हैं, बल्कि अभी भी मिल रही हैं और सफल भी हैं, फिर गोविंदा के साथ ऐसा क्यूं है.
सभी इत्तेफाक रखते हैं कि गोविंदा अपने समकालीन एक्टर से दो हाथ एक्टिंग में आगे थे. उन्हें हीरो नंबर वन यूं नहीं कहा जाता है. गोविंदा को निर्देशक डेविड धवन के निर्देशन से सजी फिल्म से हीरो नंबर वन का तमगा जरूर मिला, लेकिन गोविंदा उससे पहले भी यह तमगा सिर पर लेकर चल रहे थे. साल 1993 में रिलीज हुई गोविंदा स्टारर आंखें और शोला और शबनम और साल 1995 में रिलीज हुई उनकी फिल्म राजा बाबू और कुली नंबर-1 ने हीरो नंबर-1 वाला स्टारडम उनके हिस्से में डाल दिया था.
गोविंदा की फिल्म हीरो नंबर-1 तो साल 1998 में रिलीज हुई थी. इससे पहले साल 1996 में रिलीज हुई उनकी फिल्म किस्मत और साल 1997 में रिलीज हुई उनकी फिल्म साजन चले ससुराल ने उन्हें चांद पर बिठा दिया था. बड़ी बात यह है साल 1997 में जब उनकी फिल्म हीरो नंबर-1 रिलीज हुई थी उस साल उनकी दो और फिल्में ब्लॉकबस्टर हुई थी और दोनों फिल्मों के नाम आज भी लोगों की जुबान पर है. पहली फिल्म का नाम है नसीब और दूसरी थी दीवाना-मस्ताना.
साल 1998 में गोविंदा की बैक टू बैक तीन फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा था. साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म बड़े मिया-छोटे मिया, दुल्हे राजा और आंटी नंबर वन ने बॉक्स ऑफिस गोविंदा का झंडा गाड़ दिया था, तीनों फिल्मों में गोविंदा ने कमाल किया था.
गोविंदा के करियर में ट्विस्ट तब आना शुरू हुआ जब साल 1997-1998 के बीच उन्हें इंडस्ट्री में स्थापित समकालीन हीरोज के साथ कास्ट किया गया. यहीं गोविंदा से बड़ी गलती हो गई. बतौर सोलो हीरो चमक रहे गोविंदा ने साल 1997 में फिल्म दीवाना-मस्ताना में अनिल कपूर और 1998 में बड़े मिया-छोटे मिया में अमिताभ बच्चन के साथ काम किया.
गोविंदा-अनिल कपूर स्टारर दीवाना-मस्ताना और अमिताभ बच्चन और गोविंदा स्टारर बड़े मियां-छोटे मियां दोनों फिल्में सुपरहिट रहीं, लेकिन दोनों फिल्मों में गोविंदा अनिल कपूर और अमिताभ बच्चन दोनों पर भारी पड़े. बॉलीवुड के दोनों स्थापित कलाकारों पर गोविंदा की लाजवाब एक्टिंग भारी पड़ी, लेकिन दोनों स्थापित कलाकारों की पर्दे पर किरकिरी हो चुकी थी.
यही वह दौर था जब गोविंदा से इंडस्ट्री में स्थापित निर्देशक और निर्माताओं ने किनारा करना शुरू किया. कह सकते हैं कि स्थापित समकालीन कलाकारों के मन में गोविंदा को लेकर डर बैठ गया. गोविंदा के साथ पर्दे पर दिखने से स्टार्स का उनका स्टारडम टूटने की चिंता बैठ गई. क्योंकि ऐसी ही चोट साल 1999 में रिलीज हुई हसीना मान जाएगी में संजय दत्त को लगी थी, जिसमें गोविंदा उनके जोड़ीदार थे.
यही वजह रहा कि साल 1999 के बाद करीब 6 साल तक गोविंदा की करीब 19 फिल्में सोलो रिलीज हुईं. इनमें साल 2001-2002 में रिलीज हुई फिल्म जोड़ी नंबर वन और एक और एक ग्यारह संजय दत्त के साथ गोविंदा ने काम किया था, लेकिन के चली, जबकि सोलो फिल्म क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता, हद कर दी आपने, शिकारी और जोरू का गुलाम ने बढ़िया बिजनेस किया था.
साल 2006-07 में गोविंदा के खाते में फिर स्थापित समकालीन हीरोज के साथ काम करने का मौका हाथ लगा. साल 2006 में रिलीज हुई फिल्म भागमभाग में गोविंदा ने अक्षय कुमार और साल 2007 में रिलीज हुई पार्टनर में गोविंदा के साथ काम किया. दोनों ही फिल्में सुपरहिट रहीं, लेकिन इन दोनों फिल्मों में भी गोविंदा अपनी कॉमिक टाइमिंग और एक्टिंग से अक्षय और सलमान को खा गए.
साल 2006-07 के बाद इतिहास गवाह है कि अक्षय कुमार और सलमान खान ने गोविंदा के साथ एक भी फिल्म में फुल प्लैश करेक्टर में काम नहीं किया है और इस बात को अब दो दशक बीच चुके हैं. साल 2014 में रिलीज हुई तीन फिल्मों में गोविंदा क्रमशः हैप्पी एंडिग, किल दिल और हॉलीडे में तीन स्थापित समकालीन कलाकार के साथ नजर और पर्दे पर वो एक बार फिर तीनों कलाकारों को डकार गए.
हैप्पी एंडिंग में गोविंदा ने समकालनीन स्थापित कलाकार सैफ अली खान के समानांतर काम किया था, लेकिन सैफ अली खान उनके आगे फीके नजर आए. वहीं, फिल्म किल-दिल में गोविंदा दूसरे स्थापित समकालीन हीरो रणवीर सिंह के साथ काम किया, जिसमें रणवीर सिंह हल्के नजर आए. वहीं हॉलीडे में गोविंदा कैमियो रोल में अक्षय कुमार के साथ नजर आए थे.
कह सकते हैं कि साल 2000 से 2026 के बीच गोविंदा को समकालीन कलाकारों के साथ कास्ट नहीं किया गया, जिससे उनके करियर में उतार आता चला गया. अगर उन्हें सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की तरह फिल्में मिलती और उनके लिए फिल्में लिखी जाती तो गोविंदा का ऐसा अवसान तो कभी होता ही नहीं. सच्चाई यह है कि गोविंदा का एक्टिंग टैलेंट ही उनका दुश्मन बन गया है, तो गलत नहीं होगा, क्योंकि दूसरे कलाकारों को आज भी उनके साथ काम करके अपना स्टारडम खोने का डर लगता था.
#govinda #HeroNumberOne #govindacomedian #bollywoodnews
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें