बुधवार, 16 दिसंबर 2015

दर्शकों को बड़ी और संकुचित सोच में बांटकर शाहरूख दिलवाले हिट कराना चाहते हैं?

शाहरूख खान जैसे बकलोल ने कहा है कि कुछ संकुचित  सोच वाले लोग उनका विरोध कर रहें हैं, लेकिन इस दोगले को कोई यह बताये कि संकुचित इसकी थी, जिसने अपनी छोटी और ओछी सोच से देश के प्यार और आशीर्वाद पर असहिष्णुता कहकर बट्टा लगा दिया है।

कमीना को 18 दिसंबर को रिलीज होने जा रही अपनी नई फिल्म #दिलवाले को सुपरहिट करवानी है, इसलिए कमीने ने दर्शकों को संकुचित और बड़ी सोच में बांटकर उन्हें बेवकूफ बनाने की साजिश रची है।

ताकि एक बड़ा दर्शक वर्ग बड़ी सोच का दिखावा करने के लिए दिलवाले के खिलाफ घोषित -अघोषित बाइकाट से अलग-थलग हो जाये और दिलवाले बॉक्स ऑफिस पर कमाई कर सके?
#Dilwale #ShahRukhKhan #BoxOffice #Bollywood

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

You really changed the face of corruption Mr.Kezriwal?

Dear Delhites...Did you heard 400 % hike in your voted/elected MLA's salary?

Yeah it's true, Your so called revolutionary government AAP approved this sin and looted govt treasure/people's money at front?

Can't remember such thief like AAP party who stealing money in front of each eye with beating drums.

AAP leader Arvind kezriwal shows his style of corruption & loot against people's money!

Shame on you krzriwal... You said inncent people of Delhi that helplessly you joined Politics to clean the corruption because everyone political party are corrupt?

Now Mr. Kezriwal see your face in the mirror and decide who is most corrupt today? Think once...you got answer...?

Mr.Kezriwal... You are most corrupt leader of today who looted public money/Govt treasure in front of elected people.

You really change face of corruption Mr. Kezriwal?

#Kezriwal #AAP #Corruptipn #SalaryHike

गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

कांग्रेसी नेता कु. सैलजा भी मान गईं कि कांग्रेसी सरकारें नकारा थीं!

कांग्रेस और कांग्रेसी नेताओं की फस्ट्रेशन देखते ही बनती है। कभी यूनियन मिनिस्टर रहीं कुमारी सैलजा कहती है कि वर्ष 2013 में जब वह द्वारका स्थित मंदिर गईं थीं तो उनसे उनकी जाति पूछा गया था?

सैलजा मैडम, जब यह सवाल अगर 2013 में पूछा गया था तो बतौर यूनियन मिनिस्टर तब क्यों नहीं कुछ उखाड़ लिया और अब क्यों गड़े मुर्दे उखाड़ रही हो?

हद है मतलब...कुछ भी? क्या सैलजा जैसे नेता देश की जनता को अभी भी मूर्ख समझती हैं कि जो भी बकलोली वो करेंगी वो मान जायेगी।

सैलजा मैडम जो काम पिछले 60-65 वर्षों में कांग्रेस की कोई सरकारें नहीं कर पाई, उसे वह बीजेपी सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में ही देखना चाहती है या मकसद कुछ और है।

मैडम सैलजा यह 5, 000 वर्ष पुरानी संस्कृति है, जिसे सुधरने में वक्त लगता है और आपने कुछ किया होता तो आपको अपना मुंह खोलने हक भी होता और अब महज सरकार को बदनाम करने के लिए बनावटी असहिष्णुता का झूठा मातम कर रहीं हैं।

मैडम सैलजा ही नहीं, ऐसे तमाम कांग्रेसी नेता समाज सुधार की लुकाठी लिए जहां-तहां घूमते फिर रहें हैं, लेकिन इनमें यह बताने की जरा भी संकोच और शर्म नहीं है कि देश पर प्रत्यक्ष और परोक्ष 60 वर्ष से अधिक शासन करने वाली कांग्रेसी नेताओं ने सरकार में रहते हुए मलाई काटने के अतिरिक्त अब तक कुछ क्यों नहीं किया था?

मतलब, आज हर कांग्रेसी नेता समाज और संस्कृति सुधार के लिए निकल पड़े हैं, जिसको देखो वही ज्ञान पेल रहा है कि देश में फलां गलत है और ढेमका को सही होना चाहिए, लेकिन यह नहीं बताते उन्होंने क्या उखाड़ लिया था?

यानी कांग्रेसी यह मान चुके हैं कि देश में कुछ भी अच्छा व सुधार हो सकता है तो वह मोदी (बीजेपी) सरकार ही कर सकती है और अब तक चुनी गई कांग्रेसी सरकारें नकारा थी, जिन्होंने सिर्फ अपनी जेबें भरीं और कुछ नहीं किया?
#KumariShailja #Congress #Intolerance

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

मुस्लिमों को निजी हकों के लिए हितैषियों की जरूरत नहीं है!

शिव ओम गुप्ता
कांग्रेस समेत जितनी भी राजनीतिक पार्टियां और पार्टी के नेता मुस्लिम हितैषी होने की बात करते हैं, मुस्लिमों को सर्वाधिक इन्हीं लोगों ने ठगा है।

हिंदुस्तान में मुस्लिम की आबादी जहां कहीं भी है, वहां मुस्लिमों ने चाहते और न चाहते हुए इन्हीं चिकनी -चुपड़ी बात करने वाले राजनीतिक पार्टियों को वोट दिया है और आजादी के बाद से लेकर अब तक की मुस्लिमों की हालत किसी से छिपी नहीं है।

बात उत्तर प्रदेश की हो, या पश्चिम बंगाल अथवा बिहार की, बात साउथ की हो या नॉर्थ की। ऐसा लगता है कि देश का मुस्लिम मतदाता और मुस्लिम मतों का विभाजन अपने-अपने पाले में करने वाली पार्टियां एक दूसरे पर एहसान कर रहीं हैं?

 "हमें तो वोट तुम्हें देना ही था, नहीं तो तुम कहां जाओगे" (तथाकथित मुस्लिम हितैषी राजनीतिक दल)
"हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन पार्टी सरकार बनाती है, बस फलां को वोट नहीं करना है।" ( एक आम मुस्लिम)

मतलब, देश के मुस्लिम मतदाताओं को तथाकथित मुस्लिम हितैषी दलों ने इस कदर डरा और धमका रखा है कि देश के प्रत्येक चुनाव में हिस्सा तो जरूर लेते हैं लेकिन उनके हकों की हिस्सेदारी कभी योजनाओं में, तो कभी दान-अनुदान तक सिमट जाती है।

देश के नागरिक के तौर पर मुस्लिम प्रत्येक 5 वर्ष तक अपना राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक हक तथाकथित मुस्लिम हितैषी दलों के घर गिरवी रख आता है, लेकिन जो उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक मोर्चे पर सबल और सशक्त बनाना चाहता है, उससे उन्हें साजिश की बू आती है।

इतिहास गवाह है कि पिछले 60-65 वर्षों से देश का मुस्लिम ऐसे दंश चुपचाप झेलता आ रहा है, क्योंकि तथाकथित मुस्लिम हितैषी दलों ने उन्हें डर के चंगुल में दबा रखा है, जिससे बाहर निकल कर मुस्लिम न सोच पाते हैं और न बोल पाये हैं।

उस पर तुर्रा यह है कि मुस्लिम वोट के जरिये धन पशु बन चुके ऐसे तमाम राजनीतिक दल देश में मुस्लिमों की हालत पर मातम करते हैं और फिर डराये गये मुस्लिम हर बार डरे, सहमें और भरमे फिर उन्हीं में अपना रहनुमा भी खोज लेते हैं।

देश के मुस्लिम हितैषी राजनीतिक पार्टियां अभी देश के मुस्लिमों को असहिष्णुता नामक चोचलेबाजी से डरा रहीं है, जिसका परिणाम हम आप देख ही रहें हैं और अगर देश के सो रहे मुस्लिम नहीं जागे तो यह सिलसिला यूं ही अगले 60-65 वर्ष तक चलता ही रहेगा।

तो देश के मुस्लिम जागो और इन मुस्लिम हितैषी दलों को बता दो कि यह देश तुम्हारा है और डराने और धमकाने की राजनीति के लिए तुम्हारा वोट अब उनको नहीं मिलेगा। मुस्लिम खुद सोचें कि जब यह देश तुम्हारा है और तुम उसके नागरिक हो तो कोई कैसे भी राजनीतिक दल आपके नागरिक हितों से समझौता कर सकता है, फिर पार्टी की चेहरा लाल हो या हरा? क्या फर्क पड़ता है?