गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

हमें लोक लुभावन नहीं, प्रगति सूचक बजट मिला है, शुक्रिया प्रभु!

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ऐतिहासिक रेल बजट पेश किया है। फस्ट्रेटेड विपक्ष को छोड़ दें तो पहली बार ऐसा रेल बजट पेश हुआ है, जो लोकप्रिय और परंपरागत बजट से जुदा है।

रेल बजट 2015 एक प्रगति सूचक और संकेतक बजट है, जिसमें कोई लोक-लुभावन घोषणाएं नहीं की गई हैं, बल्कि बुनियादी विकास और सुरक्षा को प्रमुखता दी गयी है।

वरना घोषणाएं तो प्रत्येक रेल बजट में रेल मंत्री करते आये हैं, लेकिन कितनों पर अमल हुए इसका किसी के पास हिसाब नहीं है।

ज्यादा दूर नहीं, पिछले 20 वर्षों में नयी ट्रेन चलाने की गयी घोषाणाओं को उठा कर देखेंगे तो पायेंगे कि रेल मंत्रियों द्वारा घोषित नयी ट्रेनों में से 1 फीसदी ट्रेनें भी ट्रैक तक भी नहीं पहुंची?

क्या आप ऐसी फिजूल घोषणाओं के आदी हो चुके है, जिसमें सिर्फ घोषणाएं हों, काम हो न हो?

भई, क्या आप घर बना कर फ्रीज, टीवी और कूलर खरीदते हैं या घर बनने से पहले खरीद लाते हैं और उसे बाहर छोड़ देते हैं?

नि: संदेह रेल बजट 2015 एक ऐतिहासिक बजट है, जिससे न भारतीय रेल में मजबूत आयेगी, बल्कि जैसा रेल हम चाहते हैं, उस ओर रेल कदम बढ़ायेगी!

लोकप्रिय और परंपरागत रेल बजट भारतीय रेल को गर्त में ही ले जाता, ऐसा नहीं करके देश को बचा लिया आपने ,शुक्रिया प्रभु!

#रेलबजट #सुरेशप्रभु #RailBudget #SureshPrabhu 

शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

स्मार्टसिटी की अवधारणा विकास की एक प्रक्रिया है!

स्मार्टसिटी की अवधारणा विकास की एक प्रक्रिया है और चरणबद्ध तरीके से इसमें बिना किसी व्यवधान के होते रहना चाहिए। 

स्मार्टसिटी और बुलेट ट्रेन की अवधारणा को इसी तरह से लेना चाहिए जो व्यवहारिक ही नही, आवश्यक भी है, क्योंकि विकास हमेशा उत्तरोत्तर होता है और समानान्तर विकास की परिकल्पना बेमानी है कि जब सब एक समान हो जायेंगे तब आगे बढेंगे या कुछ नया करेंगे।

मसलन, हम मोबाइल फोन का आविष्कार तब तक ना करें, जब तक टेलीफोन सबके घर न पहुंचा दें , ऐसा सोचना और उसको मूर्तिरुप देना मूर्खतापूर्ण है।

सच्चाई यह है कि आज मोबाइल के आविष्कार ने टेलीफोन को एंटीक बना कर रख दिया है। ठीक इसी तरह स्मार्टसिटी की अवधारणा उतनी ही मौजू है, जितनी झुग्गी को तोड़कर फ्लैट निर्माण करना है ।

स्मार्टसिटी की अवधारणा का यह मतलब यह नहीं कि विकास गडमड्ड हो जायेगा, ऐसा सोचेंगे तो एअरप्लेन पर यात्रा मुश्किल हो जाती और हम बैलगाड़ी से चल रहे होते?

स्मार्टसिटी की परिकल्पना को विकास की तरह देखना चाहिए, जैसे औद्योगिक विकास के लिए ऩयी तकनीकी और कलपुर्जों को साथ लेकर चलना पड़ता है, वैसे ही स्मार्टसिटी को देखना चाहिए| एक साधारण उदाहरण से समझिए-

एक अनपढ़ किसान अपनी दिनचर्या में ईश्वर की पूजा 24 घंटे करता है, लेकिन 8वीं पास उसका बेटा 24 घंटे में से महज 2 घंटे ही पूजा करता है और बाकी समय वह खेती किसानी के कार्य के नवोन्मेष में लगाता है जबकि अनपढ़ किसान का पोता यानी 8वीं पास बेटे का बेटा, जो शहर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है वो ईश्वर को सिर्फ कुछ सेकेंड ही दे पाता है।

अब आप कैसे कह सकते हैं कि किसान, किसान का 8वीं पास बेटा और 8वीं पास बेटे के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे में से कौन भगवान का सबसे बड़ा भक्त है?

भक्ति और विकास एक दूसरे के पूरक है, इंसान भक्ति में अधिक समय तब तक देता है जब तक वह अज्ञानी है और ज्ञान ही वैयक्तिक, सामूहिक और सारगर्भित विकास के लिए जरूरी है ।

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

केजरीवाल साब, मॉर्निंग वॉक ही करेंगे?

केजरीवाल साब, मॉर्निंग वॉक ही करेंगे या कुछ काम भी करेंगे? आज पूरे एक हफ्ते हो गये, लेकिन न बिजली सस्ती हुई, न फ्री वाईफाई और न ही फ्री पानी पर अभी तक कोई पहल दिखी है?

हालांकि पिछली सरकार में केजरीवाल ने एक हफ्ते में ही बिजली, पानी और घूसखोरी कम करने की घोषणायें कर चुके थे?

क्या हुआ केजरीवाल साब, दिल्लीवालों को दांत खाने वाले ही दिखाये थे या दिखाने वाले?

हालांकि अभी तो आप दिल्लीवालों को यह कह कर ठेंगा भी दिखा सकते हो कि सब सिसोदिया देख रहें हैं और वहीं जबाव देंगे, क्योंकि मेरे पास कोई मंत्रालय नहीं है।

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

जीविका कमाने के लिए पत्रकारिता ?

कभी-कभी सोचता हूं कि गलत प्रोफेशन में आ गया हूं , पत्रकारिता में भी दांव-पेंच और बनियागिरी करनी होगी तो शायद ही पत्रकारिता को बतौर करियर कभी चुनता, बनियागिरी ही करता?

पत्रकारिता भी नाप-तौल करके ही करनी थी तो बनियागिरी में क्या बुराई है, बनियागिरी में कम से कम आत्मा (जमीर) पर कोई बोझ तो नहीं रहता कि जो कर रहें हैं, वह पेशेगत सही है!

पत्रकारिता करियर में पूरे 9 वर्ष का मेरा कार्यकाल काफी संघर्षपूर्ण रहा, जहां खुद (नैतिकता) के वजूद की रक्षा-सुरक्षा के लिए कईयों को उनकी औकात भी बताई है और नौकरी को लात भी मारी है।

लेकिन तथाकथित बुद्धिजीवी कहते हैं कि प्रैक्टिकल होना चाहिए? चिपकना नहीं चाहिए, इससे विकास रुक जाता है? सवाल है किसका विकास?

जीविका कमाने के लिए पत्रकारिता ? विकास के लिए पत्रकारिता? दोनों में से हम किसका चुनाव करते हैं? यही पत्रकारिता की दशा और दिशा तय करने वाले हैं?

मैं तो तैयार हूं, लेकिन क्या आने वाली नई जनरेशन इससे तालमेल बिठा पायेगी, जिसे उदाहरण तलाशने के लिए गूगल बाबा की शरण लेनी पड़ेगी?

क्योंकि ऐसी प्रजाति वाले पत्रकार विलुप्त होने के कगार पर हैं और कोई हैरिटेज सिक्युरिटी स्कीम भी नहीं है?
#पत्रकारिता #जर्नलिज्म #Journalism #Journalist #Ethics #नैतिकता

बुधवार, 18 फ़रवरी 2015

सुना है दिल्ली में स्वाइन फ्लू टेस्ट सस्ता हो गया है ?

नाशपीटे केजरीवाल, पहले तू ये इंतजाम कर दिल्ली में स्वाइन फ्लू के संक्रमण न फैले, जो कि सबसे कम है, और दूसरा कौन सा आम आदमी 4500 रुपये टेस्ट के लिए चुका सकेगा?

सच तो यह है कि आम आदमी टेस्ट के लिए 4500 रुपये खर्च करना तो दूर , जुटाने में ही ऊपर निकल जायेगा?

बकलोल, कुछ दिन ही सरकारी कैंप लगवा कर मुफ्त टेस्ट करवा लेता? वरना कुछ तो तुम्हारे वोटर्स 4500 रुपये सुनकर ही टेस्ट नहीं करवा सकेंगे?

केजरीवाल, तू खाक आम आदमी को समझता है, तुझे अगर दिल्ली वालों में महामारी स्वाइन फ्लू के संक्रमण को रोकना ही है, तो टेस्ट को फ्री कर देता ताकि आम और खास सभी तुरंत चेक करवा सके और दिल्ली को संक्रमण से अधिक सुरक्षित रखा जा सकता था?

लेकिन तू तो लगता है संक्रमण को रोकना नहीं, संक्रमण का खौफ फैलाकर लैब ऐजेंसियों को पैसे कमाने का अवसर दे रहा है, लानत है ऐसी आम आदमी सरकार पर!

#केजरीराग #मुफ्तखोर #KezriRaag #DilliWale #Freebies

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

केजरीवाल फिर बनने चला PM, सिसोदिया को सौंपा काम!

ई का हुआ...5 साल केजरीवाल तो बस जुमला बन के रह गया? ई तो 5 साल सिसोदिया हो गया।

साला फिर केजरीवाल ने दिल्ली वालों का चूतिया काट दिया, ई ससुरा केजरीवाल CM बन के राजी नहीं, इसे तो PM ही बनना है?

सुना है ससुरे ने कौनों जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है और सारा बोझ सिसोदिया पर लाद दिया है ..

यानी सिसोदिया दिल्ली वालों को मूर्ख बनावेगा और केजरीवाल एक बार PM बनने के लिए पूरे देश को मूर्ख बनाने निकलेगा?

बहुत तरस आ रहा है दिल्ली के मतदाताओं पर... केजरीवाल ने कैसा मूर्ख बनाया ?

केजरीवाल जानता है कि वो दिल्लीवालों को किये वादों को कभी पूरा नहीं कर पायेगा इसलिए कोई मंत्रालय नहीं लिया...ताकि ससुरे पर कोई कुछ कह नहीं पावेगा और केजरीवाल खुद भी सिसोदिया को डांट कर पल्ला झाड़ते हुए दिल्लीवालों का चूतिया काट देगा!

तो दिल्लीवालों अब तो तुम्हारी लग गई, क्योंकि जिस पर भरोसा करके आपने AAP को अपने वोट दिये थे, उसने तो हाथ धो लिए और वह PM बनने फिर दिल्ली छोड़कर निकल लिया!

#केजरीवाल #दिल्ली #Kezriwal #AAP #Delhi

शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

फ्री WIFI पर दिल्लीवासियों को मिला तगड़ा झटका!

फ्री WIFI की बाट जोह रहे दिल्ली वासियों को जैसे ही पता चला कि केजरीवाल 24 घंटे में महज 30 मिनट ही WIFI फ्री देगा तो देखिये दिल्ली वालों ने कैसा ठगा हुआ महसूस किया और कैसे AAP पार्टी की खिल्ली उड़ाई और उनके वादों का कैसा मजाक बनाया है।

नीचे देखिये फेसबुक पर दी गई कुछ मजेदार टिप्पणी-

"दिल्ली में मिलेगा सिर्फ 30 मिनट फ्री Wi-Fi, उसमे
भी सिर्फ Govt की साईट खुलेगी। साला छोटी गंगा बोल के नाले में कूदा दिया बे!"

"ye to abhi shuruat hai..aage aage dekho delhi valo ki lottery lagne vali hai :p

Congratulations Delhi walo, "C#utiya" kata hai :P"

"may AAPian  look .gov website for upcoming 800000 jobs for delhi people :P :P :P or vacany for teachers in 500 schools or how much water they consume in a day ..may also download their own cctv footage  for selfie from that 1500000 ctv camera :P :P :P"

"दिल्ली वालो की हालत जुदाई फ़िल्म के जॉनी लीवर जैसी हो गई !!
दुल्हन का घूंघट उठाते ही दुल्हन बोली " अब्बा डब्बा चब्बा"

"चार दिन पहले तक "15 लाख...15 लाख" चिल्लाने वाले  टोपी वाले  अब "15 लाख CCTV, 10 लाख पक्के मकान, और 8 लाख नौकरियां" सुनकर ऐसे बिलबिलाता उठते हैं जैसे उन पर किसी ने पेट्रोल डाल दिया हो ...."

"ye toh chutzpa ho gaya..! koi nai aadat daal lo this is the first one , many more to come."

"WiFi 30min, Paani 15 min Bijlee 5 min aurEntertainment 5 saal!!!! # 5saalkejribawal"

"dehli walon kejriwal tumhari keh ke lega :p"

"अभी तीस मिनट के लिए फ्री वाईफाई दे रहे हैं केजरीवाल, कल को ये भी कह सकते हैं कि मुफ्त पानी सिर्फ g.... धोने के लिए ही मिलेगा।"

"ab AAPtards ki topi par likha hoga-"मुझे चाहिए सम्पूर्ण वाई फाई"!"

"U-Turn No 1......many more to follow"

"Voting for AAP was subject to Delhiwala's risk... Please you should have read the documents (manifesto)before voting."

"Ye afwaah kaun uda raha hai...ki ghar ki chhat par jhaadu latkaane se free WiFi network milega."

"yeh lulz ho gaya dilliwalo ke sath, lekin party toh abhi suru huyi hai :D"

"Dear Aaptards, Wifi Ke baare me suna? Hahaha... kejru tum sabko C bana gaya.. #BellMuft"

"Ohh...ni de re kya koi b FREE thngz... :/ m toh dilli shift hone soch ri thi..o_O awww me. :/ :("

"Sab ko milga free me.. baba ji ka thullu.. :D"

"जिसको wifi फ़्री करना है वो जाके अपनी भैंस चराए !! :D"

"Hahaha...yeh toh 22 karat waale offer jaisi baat hogayi..
Socha 22 Karat Gold, aur mile 22 Carrots (Gajar)"

"Delhiwalas maze hain tumhare #5SaalJhelo"

"haha , lo ji aur vote karo free free free ke chakkar mein.. mila baba ji ka thullu :D"

"Ab to koi opposition v nai hai kon bachayega dlhiwalo ko ye sb torture se.....democracy ko autocracy me badal diya dlhiwalo ne.."

"Ye to hona he tha.
Waise ye adhuri khabar hai puri khabar ye hai ki.
1).Free pani milega sirf hath dhone k liye.
2).Bijali bhi free milega but sirf mobile charge karne k liye."

"C.M is angain bcome C.A
Kajriwal Condition Apply."

"Yeh toh shurwat hai dekh aage aage kaise Chutiya banata hai"

"I hope they don't give water also like this. Thirty minutes water or stay dry all day!  Aap cheat")

"Dilliwalo ye toh LOL 😁 ho gaya"

"Bhai logon itne me toh irctc ki site khulegi bhi nahi."

"अब दिल्ली की हालत उस लड़की की तरह हो गयी है, जिसे एक बेरोज़गार लड़के ने चाँद तारों के सपने दिखा कर ब्याह तो कर लिया....पर घर लाके बता रहा है कि..."......सब कुछ लाऊंगा बेबी अगर पापा पैसे देंगे तो.."
http://indianexpress.com/article/cities/delhi/aap-proposes-wifi-access-across-delhi/

बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

हम तो ऐसे हैं भैय्या?

दिल्ली चुनावों का सबसे अच्छा विश्लेषण वाशिंगटन पोस्ट ने किया है, अख़बार ने लिखा है की भारत की जनता मुफ्त में हर चीज पाना चाहती है, यही कारण है की भारत में इतनी बेकारी और गरीबी है।

अखबार ने आगे लिखा है, अच्छा है कि अमेरिका में अभी यह ट्रेंड शुरू नही हुआ वरना अमेरिका दिवालिया हो जायेगा ?

अखबार के मुताबिक जैसे यूपी में एक पार्टी ने मुफ्त में लैपटॉप और सिर्फ १००० रुपये यानी आठ डालर महीने देने का वायदा करके बम्पर जीत हासिल की, तमिलनाडु में एक पार्टी में जूसर मिक्सर ग्राइंडर देकर जीत हासिल की!

अखबार कहती है कि लेकिन जनता को सोचना चाहिए कि कोई भी पार्टी यह अपने पार्टी फंड से नही बल्कि सरकारी फंड से ही देती है जो जनता के टैक्स से ही आता है!

अखबार रिपोर्ट कहती है कि यदि सरकारी खजाने से बांटे गये मुफ्त पैसे विकास कार्यो में खर्च होते तो आज भारत बहुत आगे होता?

"आप" से हारने के लिए चुनाव लड़ रही थी बीजेपी?

मुझे लगता है बीजेपी दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ रही थी और वह महज लड़ाई दिखाने के लिए लड़ाई का माहौल तैयार कर रही थी?

पार्टी केजरीवाल के संदर्भ में हमेशा से ही ढीली रही, वरना चुनाव में देरी, ऐन वक्त रणनीति में बदलाव और प्रचार कैंपेन में निगेटिविटी बीजेपी और मोदी-अमित शाह की शैली कभी रही नहीं है?

दिल्ली विधानसभा के इस चुनाव में पार्टी भली भांति से दिल्ली में ऐसे टर्न आउट की संभावना चाहती थी और उसने वोटरों को पुकारा तो जरूर पर ललचाया नहीं? यही नहीं, बीजेपी ने केजरीवाल को जानबूझ कर अंडरडॉग की तरह पेश किया? हर वो निगेटिव प्रचार-प्रसार किया जिससे केजरीवाल के प्रति जनता का ऑटोमेटिक जुड़ाव पैदा हो और हुआ!

बीजेपी ने चुनाव रणनीति और कैंपेन में जितनी तब्दीली दिल्ली विधानसभा चुनाव में की है, ऐसे उदाहरण विरले ही देखने में मिलता है? चुनाव घोषणा पत्र की विजन डॉक्युमेंट इनमें से एक है?

मतलब..बीजेपी ने लड़ाई में बने रहने के लिए साम, दाम, दंड और भेद सारे इस्तेमाल किये, लेकिन चुनाव हारने के सारे इंतजाम पहले ही कर दिये थे। (अब सवाल है कि आखिर बीजेपी चुनाव हारना क्यों चाहती थी ? इसकी चर्चा अगले लेख में करेंगे!)

क्योंकि दिल्ली की जनता ने मोदी को अंडरडॉग बनाये जाने की दशा में लोकसभा चुनाव में दिल्ली की कुल 7 सीटें जितवा कर दी थी, ठीक वैसे ही मंसूबे बीजेपी ने केजरीवाल के लिए तैयार किया और केजरीवाल अब दिल्ली के सीएम बनने जा रहें हैं!

आप खुद देखेंगे, यह लैंडस्लाइड जीत केजरीवाल की नहीं ,जनता की है, जो केजरीवाल को हर हाल में सीएम बनना चाहती थी?

वरना कौन कह सकता था कि केजरीवाल एंड पार्टी 70 विधानसभा सीट में से 67 सीट जीत सकेंगे, बकवास भले कोई कर ले? हालांकि बीजेपी इतनी बुरी हार वहीं चाहती थी, लेकिन जनता का जनादेश ऐसे ही मिलता है, उन्हें याद है उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर अकल्पनीय 73 सीटों पर जीत?

कांग्रेस को छोड़िये, निर्दलीय तक को भी वोट नहीं देना, दिल्ली का एग्रेशन ही है कि कोई चांस नहीं लेना था और लैंडस्लाइड जीत बताता है कि उन्होंने किस शिद्दत से केजरीवाल को वोट किया है?

केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के जो खिलंदड़े टाइप के नेता हैं अगर इस जीत को अपनी जीत मानने की भूल करते हैं तो उनके और उनकी पार्टी के लिए यही 5 साल कब्रगाह भी साबित हो जा़येगा?

जाहिर है जीत पर इतराने से बेहतर है कि जीत की खुमारी से केजरीवाल एंड पार्टी के नेता निकले और ईमानदारी और मेहनत से दिल्ली को किये वादों को पूरा करने में सर्वस्व लगा दें ,क्योंकि वोटर किसी का सगा नहीं होता?

 #AAP #Kezriwal #Delhipoll #BJP #Modi

दिल्ली छोड़, अब पंजाब को जीतेगी आम आदमी पार्टी ?

आम आदमी पार्टी के बड़बोले नेता और कविराज कुमार विश्वास का कहना है कि पार्टी पंजाब विधानसभा का चुनाव भी लड़ेगी? 

ऐसे चाल-चरित्र के चलते पूरे देश की जनता ने लोकसभा चुनाव में पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया था और अभी एक चुनाव जीते नहीं कि कुमार विश्वास जैसे छिछले (नेता?) कड़ाही में पड़े पकौड़े की तरह फूलने लग गये?

कविराज जी, दिल्ली की जनता ने साम्राज्य विस्तार के लिए वोट नहीं दिया है, अब भौकाल का काम गया, काम करो, जिसके लिए जनता ने सबको छोड़कर तुम्हारी पार्टी को मौका दिया है।

याद रखो...जो मुफ्त का सब्जबाग दिल्ली की जनता को तुम लोगों ने दिखाया है उसको पूरा करना पड़ेगा, वो कैसा पूरा करना है उसकी सोचो, पंजाब का चुनाव अभी दूर है?

पहले दिल्ली में किये वादे पूरी करके दिखाओ फिर कहीं और की सोचो? कुछ सांस ले लो...मियां कुमार विश्वास, बयान देने और गाली देने का वक्त निकल चुका है, अब काम करो वरना जनता आती है?
  #AAP #Kezriwal #DelhiPoll #BJP #Congress #KumarBiswas

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2015

Kezriwal will exposed if not able to fulfill his promises!

AAP leader Arvind Kezriwal will exposed early if he get chance to form government again and whoever voted him will shouted first if he failed to fulfill his proposed promises.

Kezriwal make lots of false promises in his election campaign that can't be fulfill under limited power and budget of Delhi territory, Because Delhi are not state, and such things people couldn't understand.

Although, It is the basic interest of democracy that such government early go down as rise who doesn't have vision. So chill out...see whatever happened at 10 February and have ready to taste of D-Democracy.

Delhi voted neither Modi nor Kezriwal ?

Delhi voters not listened Modi nor Kezriwal, they listen own and his/her soul, And voting formula was PM for Modi , CM for Kezriwal.

If you remember, In 2013 assembly election Delhi voters given support to AAP by this formula and AAP won 28 seat in debut.

Its fact, almost 90℅ youth voters are supporter of Modi who voted Kezriwal last election because youth wants modi rule center and Kezriwal rule Delhi.

Therefore don't think about Kezriwal magic behind 67 seat victory over 70 assembly seat. These figure happened only the sake of Delhi voters specific choice.

It was a stupidity to give statement, "Its defeat of Modi or BJP ? You can call this  tranmendous victory of Democracy, who runs by public and rule by public.

If anyone recall his memory they found the answer would be right!

Kezriwal himself quoted this formula in his first election campaign through own party website, where they literally wrote, "Modi for PM and Kezriwal for CM?"(Later party deleted this after controversy)

पब्लिक सिंपैथी से हीरो बने केजरीवाल?

कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने नकारात्मक प्रचार-प्रसार के जरिये मोदी कोे हरसंभव रोकने की कोशिश की और मोदी लगातार पब्लिक सिंपैथी मिलती गई और वो प्रधानमंत्री बन गये!

लेकिन बीजेपी ने कुछ नहीं सीखा और केजरीवाल के खिलाफ नकारात्मक प्रचार-प्रसार के जरिये केजरीवाल को हरसंभव रोकने की कोशिश की और केजरीवाल को भी पब्लिक सिंपैथी हासिल हो गई और वे अब मुख्यमंत्री बन जायेंगे?

सवाल यह है कि महज 9 महीनों में बीजेपी यह कैसे भूल गई कि बीजेपी को अपार जन समर्थन मोदी के खिलाफ लगातार नकारात्मक प्रचार-प्रसार से मिला था, जो उन्होंने केजरीवाल के खिलाफ वहीं करके सूद समेत वापस लौटा दिया ?

यानी बीजेपी नहीं समझी कि नकारात्मक प्रचार-प्रसार का लाभ पब्लिक सिंपैथी के रुप में विरोधी पार्टी को ही मिलता है, जैसा मोदी को मिला था!

रविवार, 8 फ़रवरी 2015

तथाकथित पत्रकारों ने लूट ली पार्टी, सदमें में केजरीवाल?

7 फरवरी, 2015 यानी आज की एक बात बिल्कुल पल्ले नहीं पड़ी कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव आम आदमी पार्टी ही लड़ रही थी या कोई और?

क्योंकि एग्जिट पोल के नतीजों पर तथाकथित वरिष्ठ पत्रकारों का समूह केजरीवाल एंड पार्टी की तुलना में कुछ ज्यादा ही खुमारी में दिखी, जबकि टीवी स्क्रीन की विंडो से झांक रहा कोई भी AAP नेता नतीजों से उतना उछलता-कूदता नहीं दिखा जितना तथाकथित पत्रकार बिरादरी उछल रही थी...

यकीन न हो तो किसी भी नामी-गिरामी पत्रकार की फेसबुक-टि्वटर अकाउंट और टाइम लाइन पर मुंह मार आइये, सबूत वहीं बिखरे पड़े हैं!

क्या भाई, क्या चल रहा है सब? पत्रकारिता तो गिरवी नहीं रख दी आप लोगों ने, गिरेबां झांक लो अपने-अपने? या फिर राजनीति में प्रवेश का इंतजाम हो रहा है, लाइक-आशुतोष, लाइक आशीष खेतान ?

एक बात तो समझ में आती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पत्रकार बिरादरी को वो तवज्जों नहीं देते है, जैसा तवज्जों उन्हें पिछली सरकारों (कांग्रेस सरकार) में पाने की आदत मिली है? हो सकता है इससे पत्रकारों का एक तबका नाराज हो?

क्योंकि यह सार्वजनिक सच है कि दिल्ली में मोदी सरकार बनने के बाद तथाकथित नामी-गिरामी पत्रकारों की इज्जत पर बट्टा लगा है, वो इसलिए कि मोदी पत्रकारों को अधिक मुंह नहीं लगाते हैं और विदेशी दौरों पर भी उन्होंने पत्रकारों को मुफ्त की सैर पर रोक लगा दी है?

कहीं ये तो नहीं, कहीं वो तो नहीं और कहीं वैसा तो नहीं, अरे नहीं कही ऐसा तो नहीं, जिससे पत्रकार पत्रकारिता की साख पर रिवेंज का खेल तो नहीं खेल रहें हैं?

वरना बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना टाइप हमारे वरिष्ठतम पत्रकार क्यों झुम रहे होते? कुछ तो गड़बड़ है, वैसे- कब है १० फरवरी हैं, कब है १० फरवरी?

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

दिल्ली देखो, केजरीवाल को किसका मिल रहा है साथ?


1-ममता बनर्जी, जिसके आधे से अधिक सांसद 24,000 करोड़ रुपये के सारदा चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार हो चुके हैं!

2-सीपीएम नेता प्रकाश करात, जिनकी राजनीति बांटो और राज करो की है, पश्चिम बंगाल जिसके शासन काल में गर्त में चला गया, क्योंकि ये भी केजरीवाल की तरह धरना और हड़ताल प्रधान नेता हैं!

3-नीतीश कुमार - इन्हें तो अभी भूले नहीं होंगे, जो केजरीवाल की तरह मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने के सपने के लिए राज्य की जनादेश और भावनाओं को लात मार दिया था!

4- मुलायम यादव- उत्तर प्रदेश में पिछले ढाई वर्ष के शासन काल की हालत किसी से छिपी नहीं है, बलात्कार, हत्या और अराजकता अखिलेश सरकार में कैसे बढ़ा है, सभी जानते है और महिला सुरक्षा पर मुलायम की सोच तो आपको याद ही होगी,  "लड़कों से गलतियां हो जाती है?"

ये हैं केजरीवाल के समर्थक नेता? सोचिए, ऊपर के इन चारो नेताओं का साथ केजरीवाल को क्यों मिला?

भई, इनकी कुंडली कहीं न कहीं एक है, ये चारो नेता स्वार्थी, अराजक, धरनेबाज, घोटालेबाज है और प्रधानमंत्री बनने की चाहत रखने वाले ही नेता हैं? इनका विकास और देश की तरक्की से कुछ लेना देना नहीं है बस अपना विकास और तरक्की ही इनका प्रमुख एजेंडा है?

उदाहरण के लिए, नीतीश कुमार ने बिहार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर मुलायम और लालू का दामन इसलिए पकड़ लिया, क्योंकि नीतीश प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं?

ममता बनर्जी लोक सभा चुनाव और बाद में मोदी विरोधी इसलिए बनी हुई हैं, क्योंकि उन्हें भी प्रधानमंत्री बनना है?

मुलायम यादव ने उत्तर प्रदेश को भले ही पुत्तर प्रदेश बना दिया है, लेकिन प्रधानमंत्री न बन पाने की कसक दिन रात उन्हें परेशान करती है और अभी तो उन्होंने महागठबंधन भी खड़ा किया है, महज प्रधानमंत्री बनने के लिए, जो प्रदेश नहीं संभाल सके वे देश संभालने का सपना देख रहें हैं?

एक लाइन में कहें तो केजरीवाल के समर्थक नेताओं में काफी समानताएं है, जो राजनीति में तकरीबन एक जैसी राय रखते हैं और ठीक भी है, भई दो स्वभाव के लोग एक साथ थोड़े ही बैठेंगे ?

अब दिल्ली की जनता आप खुद ही तय कीजिए कि केजरीवाल को वोट देकर दिल्ली को पश्चिम बंगाल बनाना है या बिहार बनाना है अथवा उत्तर प्रदेश ?

 #AAP #Kezriwal #DelhiPoll #BJP #KiranBedi #NitishKumar #MamtaBenerjee #MulayamYadav #SardaScam

बुधवार, 4 फ़रवरी 2015

AIB रोस्ट के विरोधी खुलेआम कबीरा रस लेकर गाते है?

मुझे #AIB roast पर मचा घमासन निहायत ही बेतुका लगता है, कोई भी ग्रुप में एक बंद कमरे में बैठकर बिना किसी को एक्सप्लॉइट किये कैसे भी भाषा में बात व मजाक कर सकता है, खुलेआम सड़क पर तो ऐसा कुछ नहीं किया गया, प्रोग्राम का लाइव प्रसारण तो नहीं किया गया? 

"कबीरा " का नाम सुना है आपने, जो होलिका दहन के बाद गाया जाता हैं,  किसी को मालूम है क्या होता है कबीरा?

#कबीरा, ऐसा लोक गाना है जिसे होली त्योहार में होलिका दहन और बाद में नशे और भांग में धुत लोगों की टुकड़ी खुलेआम गली - गली के हर परिवार के मुंह पर ऐसी - ऐसी कच्ची-पक्की गालियां देते हैं कि शर्म से चेहरा लाल हो जाती है, लेकिन उसे सामाजिक मान्यता है,  तो AIB पर दोहरा मापदंड क्यों, संस्कृति बिगड़ने का रोना क्यों?

#AIB रोस्ट तो फिर भी ठीक है, जो बंद कमरे में की गई, जिसे लाइव भी नहीं दिखाया गया, फिर हाय तौबा क्यों?

#AIB रोस्ट शो के वीडियो यू ट्यूब पर डाले जाने का विरोध क्यों हो रहा है, जबकि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी अवैध अकाउंट के जरिये पोर्न फिल्में दबाकर देख रहें हैं, उसका क्या?

#AIBRousterControversy #KaranJohar #ArjunKapoor #RanveerSingh
#Kabira 

क्या मोदी सरकार से आहत हैं न्यूज चैनल कारोबारी?

शिव ओम गुप्ता
अनायाश ही ऐसा भरोसा होता जा रहा है कि खासकर ब्रॉडकॉस्ट मीडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के लगातार विस्तार से आहत ही नहीं, छटापटा सी रही है? 

मैं वजहों में नहीं जाते हैं , लेकिन टीवी मीडिया एक और राज्य में बीजेपी की सरकार बनता नहीं देखना चाहती है और केजरीवाल के पक्ष में एक एजेण्डा बनाने में मर-खप रही है, जो कतई मीडिया का काम नहीं है, और अगर है भी तो सबसे निचले दर्जे का काम है!

टीवी की घबड़ाहट और छटपटाहट की कई वजहें यहां गिनाई जा सकती हैं, जिनमें प्रमुख हैं मुद्दों की कमी और  24x7 का समाचार चैनल?

मीडिया धंधे (जगत) से जुड़े कई बड़े तबकों का मानना है कि अगर दिल्ली में भी मोदी नीत बीजेपी की सरकार बन गई तो समाचार चैनलों का सारा मसाला खत्म हो जायेगा अथवा समाचार चैनल्स बिना चीनी की फीकी चाय होकर रह जायेंगी?

शायद इसलिए ज्यादातर टीवी मीडिया सीधे-सीधे दिल्ली में बीजेपी को हारती हुई और केजरीवाल की पार्टी को जीतते हुए बतलाने को मजबूर हैं?

क्यों? सवाल अच्छा है, क्योंकि मोदी के सत्ता में आते ही जिस तरह से मीडियाकर्मियों की आवभगत में कमी आई है, वैसा पहले कभी किसी भी सरकार के कार्यकाल में नहीं हुआ?

दूसरे, मोदी के दिल्ली पधारने के बाद से ही मीडिया की विभिन्न मंत्रालयों की मलाई खाने और मसालेदार खबरें पाने के स्रोत भी सूखते गये है!

क्योंकि मोदी खुद ही नहीं, अपने सभी मंत्रालयों के मंत्रियों को भी मीडिया से एक निश्चित दूरी और पत्रकारों से निकटता कम रखने की सलाह दी है, जिससे टीवी मीडिया का पसंदीदा और प्रिय न्यूज बीट "मसाला न्यूज" बुलेटन से पूर्णतया विलुप्त हो चुका है!

मसालेदार खबरों का टीवी मीडिया में ऐसा नाता है कि जैसे जल बिन मछली,  लेकिन  मोदी के बाद चैनलों  में मसालेदार खबरों का ऐसा टोटा है कि टीवी पत्रकार ही नहीं, टीवी चैनलों के मालिक भी हैरान-"परेशान हैं कि करे तो क्या करें?

ऐसे में केजरीवाल को मोदी से ऊपर बताने और दर्शाने का खेल हो रहा है, और देखा जाये तो यह टीवी मीडिया की मजबूरी भी है!

भई, हर प्रदेश में मोदी नीत बीजेपी की सरकार सत्ता में आ गई तो धंधा तो चौपट हुआ समझो? भाई मसालेदार खबर कैसे मिलेंगे?

क्योंकि ज्यादातर टीवी न्यूज चैनलों का कारोबार ही मलाईदार और मसालेदार खबरों पर चलता है, क्योंकि भारतीय न्यूज चैनल विकास और सकारात्मक खबरों से नहीं चलती हैं, इन्हें हर पल मसालेदार ब्रेकिंग न्यूज चाहिए, जिसे सेन्सेनलाइज करके परोसा जा सके और ज्यादा से ज्यादा टीआरपी हासिल किया जा सके!

इन सब के बीच में पत्रकारिता और नौतिकता तेल लेने जाती है तो जाये तेल लेने, इनकी बला से!

छोटा सा उदाहरण-एबीपी न्यूज चैनल-नील्सन ने 26 जनवरी, 2015 के दिल्ली सर्वे में कुल 70 विधानसभा सीटों पर किए तथाकथित सर्वे के आधार पर बीजेपी को 37-40 सीटों पर जीतने का अनुमान किया और क्रमश: आप और कांग्रेस को दूसरी और तीसरी पार्टी घोषित किया!

लेकिन 2 फरवरी ,2015 को किये दूसरे सर्वे में एबीपी-निल्शन सर्वे में बीजेपी को दूसरे नंबर ढकेल दिया गया और आप पार्टी को पहले नंबर पर ठेल दिया,  एबीपी-निल्शन ने आप पार्टी को 39-42 सीट और बीजेपी को 29 सीटों पर सिमटने का शिगूफा छोड़ दिया!

लेकिन 2 फरवरी ,2015 को किये एबीपी-निल्शन सर्वे में से एक बात दर्शकों से बेहद ही चतुराई से छुपा ली गई,  वो यह कि 2 फरवरी के सर्वे में दिल्ली विधानसभा के केवल 35 सीटों पर सर्वे किये गये और 35 सीटों के आधार पर ही आप पार्टी को 39-42 सीटें दे दी गई और बीजेपी की सीटें घटाकर 29 कर दी गई?

समझिये, एबीपी-निल्शन और ऐसे ही उन तमाम न्यूज चैनलों के सर्वे की ही तरह, जो निजी हितों के लिए दिल्ली की जनता को गुमराह कर रहें हैं और संविधान के चौथे स्तंभ का जनाजा निकाल रहें हैं!

#TvMedia #AAP #Kezriwal #DelhiPoll #BJP #KiranBedi #Modi #MediaEthics 

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2015

फर्जीवाड़े से नाराज हुआ केजरीवाल का मजबूत वोटर वर्ग!

आम आदमी पार्टी के हवाला और मनी लांन्ड्रिंग कारनामे से केजरीवाल को उन वोटरों से हाथ धोना पड़ेगा, जिनके बलबूते केजरीवाल दिल्ली की कुर्सी पर बैठने का सपना देख रहे थे!

 2 करोड़ रुपये के फर्जी वाड़े का सर्वाधिक नुकसान केजरीवाल को हुआ है, क्योंकि फर्जी वाड़े वाली सारी कंपनियां उन्‍हीं के मजबूत वोटरों की झुग्गी-झोपड़ी में स्थित है,  जहां पर पिछले दो दिनों से रिपोरेटरों ने खाक छानी है?

इससे केजरीवाल के मजबूत वोट वर्ग काफी नाराज हुए है और केजरीवाल के खिलाफ हो गए हैं और कह रहें हैं कि केजरीवाल ने उनकी इज्जत उछाल दी है!

क्योंकि जिन पतों पर फर्जी कंपनियों के नाम दर्ज है, वहाँ रह रहे मकान मालिक रिपोरेटरों के सवालों से आहत हैं और बेहद अपमानित महसूस कर रहें हैं, क्योंकि मीडिया वाले उनसे 50 लाख रुपये का हिसाब पूछ रहें हैं?