मंगलवार, 9 दिसंबर 2014

अंगूर खट्टे हैं, चखने को नहीं मिले तो चीखे केजरीवाल!

कहते हैं कि आदमी की औकात उसकी बोल-बच्चन से पता चला जाता है! 

सुना है आजकल अरविंद केजरीवाल चंदा मांगने दिल्ली से दूर अमेरिका प्रवास पर हैं, जहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रॉक स्टार स्वागत पर पूरा भारत ही नहीं,  जहां - जहां भारतीय बसते हैं सीना चौड़ा हो गया था! 

लेकिन केजरीवाल साब को जब अमेरिका में वैसा स्वागत समारोह तो छोड़ो कोई पूछ-तवज्जो तक नहीं मिला तो अमेरिका में अपनी औकात दिखाते हुए उन्होंने उल्टी कर दी है। 

बोले, " प्रधानमंत्रियों को मनोरंजन के लिए विदेश यात्राएं नहीं करनी चाहिए" 

इसे ही कहते हैं आदमी की औकात, जिसकी फितरत जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव पर बदलने में देरी नहीं लगती है। 

राजनीतिक में उठा-पटक तो ठीक है, लेकिन ऐसी बेहूदगी तो एक सामान्य नागरिक भी नहीं करेगा और फिर  जनाब केजरीवाल तो देश की प्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिशें पाल रखी थी! 

प्रधानमंत्री देश का प्रधानमंत्री होता है और विदेश में भारतीय नागरिक ही अपने देश के प्रधानमंत्री का मजाक बनाएगा तो बाहर देश की साख पर बट्टा नहीं  लगेगा? 

धिक्कार है केजरीवाल तुम पर! थोड़ी बहुत जो साख जो बची थी वो भी खत्म कर दी तुमने,  तुमने खुद पांव पर कुल्हाड़ी मार ली है! 

आओ बेटा, अमेरिका से चंदा लेकर लौटो दिल्ली और मांगना दिल्ली से वोट... इस बार जनता चांटे नहीं, जूते-चप्पल से स्वागत करेगी! 

भरोसा नहीं तो पढ़िए नवभारत टाइम्स की पूरी स्टोरी-
http://navbharattimes.indiatimes.com/world/america/pms-shouldnt-go-abroad-for-entertainment-value-arvind-kejriwal/articleshow/45433374.cms

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