सोमवार, 20 अप्रैल 2015

फिर धरने पर केजरीवाल, उन 70 वादों का क्या?

शिव ओम गुप्ता
अबे जो निवाला मुंह में ले रखा है पहले उसको निगल? फिर दूसरे निवाले के बारे में सोचना?

कहने का मतलब है कि भाई केजरीवाल पहले उन 70 वादों को पूरा करो, जिसके चक्कर में दिल्ली ने तुम्हें मुख्यमंत्री की गद्दी सौंप दी है?

और तुम हो कि इधर-उधर की बातें करके दिल्लीवालों को बेवकूफ पर बेवकूफ बनाये जा रहे हो?

कभी दिल्ली में किसान ढूंढ लाते हो, फिर फिजूल की पब्लिसिटी के लिए उन्हें मुआवजा बांटने का तिकड़म करते हो और दिल्ली को जिम्मेदारी छोड़कर धरने पर बैठने जा रहे हो?

भाई केजरीवाल, तूने ही कहा था कि दिल्ली को छोड़कर तुम्हारी पार्टी कहीं और के बारे नहीं सोचेगी और पूरा ध्यान दिल्लीवालों की उम्मीदों को पूरा करने में देगी।

और फिर तुमने इसीलिए तो योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को किनारे लगाया क्योंकि वे दिल्ली से बाहर पार्टी का विस्तार चाहते थे और ऐसा तुम नहीं चाहते थे, सच है कि नही?

अब अगर पार्टी दिल्ली से बाहर अभी विस्तार नहीं चाहती है तो भूमि अधिग्रहण विधेयक और मुआवजे की राजनीति क्यों कर रही है?

ये तो वही बात हो गई कि चील का उड़ना कम और चिल्लाना ज्यादा? कुछ काम कर लो बेटा केजरीवाल वरना कहीं ऐसा न हो कि चौबे जी गये छब्बे बनने और दूबे बनकर लौटे?

#Kezriwal #AAP #Delhi #LandAcquisitionBill #Congress

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें